25 करोड़ से अधिक लागत की योजना धरातल पर

पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल बलूनी भले ही अभी तक “मेरा गांव मेरा वोट” और इगास पर्व मनाने जैसे आह्वान को लेकर पहाड़ की अवधारणा को मज़बूत करते दिखें हों किन्तु अब केदारनाथ व हेमकुण्ड साहिब के लिए रोपवे की मंजूरी व पौड़ी में तारामंडल और माउंटेन म्यूज़ियम जैसे दीर्घकालिक विकास की योजनाओं को मंजूरी दिलवाने में उनकी अहम भूमिका से उनकी सस्टेनेबल विकास की सोच परिलक्षित हुई है।
राज्यसभा सांसद के कार्यकाल के दौरान जब अनिल बलूनी द्वारा अपनी सांसद निधि से 15 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंडल मुख्यालय पौड़ी में माउंटेन म्यूजियम व प्लेटेनोरियम की स्थापना के लिए जारी की गई तो कतिपय लोगों द्वारा सांसद निधि के उपयोग को लेकर सवाल भी उठाए गए, किन्तु बलूनी की सस्टेनेबल डेवलपमेंट की सोच का परिणाम था कि उन्होंने इन दोनों प्रोजेक्ट के लिए न केवल अपनी सांसद निधि बल्कि अन्य मदों से भी बजट की व्यवस्था कर करीब 25 करोड़ से अधिक लागत की इन योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य शुरू करवाया।
प्रायः यह देखा जाता है कि सांसद व विधायक निधि जैसे बजट रास्ते, खडींचे या छोटे मोटे निर्माण में व्यय हो जाते हैं, जबकि माउंटेन म्यूजियम व तारामंडल की स्थापना से न केवल गढ़वाल मंडल मुख्यालय में दो नए लैंड मार्क स्थापित होंगे बल्कि इससे यहां अध्धयन व अन्य गतिविधियों में रुचि रखने वाले पर्यटकों की आमद भी बढ़ेगी। जो सतत रूप से कारोबारी गतिविधियों के इज़ाफ़े में सहायक सिद्ध हो सकती है। अपरोक्ष रूप से मिलने वाले इस रोजगार से आजीविका उन्नयन को भी बल मिलेगा।
हाल ही में भारत सरकार ने पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत केदार धाम व हेमकुण्ड साहिब तक रोपवे निर्माण के लिए 6 हजार करोड़ की परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं को मंजूरी दिलवाने में भी यहां के सांसद अनिल बलूनी की प्रमुख भूमिका रही है। रोपवे के निर्माण से जहां हवाई सेवा पर दबाव कम होगा वहीं हेलीकॉप्टर संचालन के चलते इकोसिस्टम को पंहुच रही हानि से भी काफी हद तक निजात मिल सकेगी।
मतदाताओं की संख्या के आधार पर हो रहे परिसीमन के खतरों को भांपते हुए सांसद बलूनी पूर्व से ही “मेरा वोट मेरा गांव” अभियान चलाए हुए हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में यह भी कहा कि उनका इरादा है कि वह वर्ष 2025 में अपने संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में एक लाख का इज़ाफ़ा करने को देश भर में प्रवासियों से मिलकर उनसे गांव की वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करने का आह्वान करेंगे। बलूनी के इस अभियान का पहाड़ के अन्य सांसदों व विधायकों को भी करना चाहिए, क्योंकि जनसंख्या के मानक पर यदि परिसीमन होता है तो पहाड़ में घटती मतदाता संख्या यहां के प्रतिनिधित्व को और कम कर देगी।
सांसद बलूनी इगास पर्व को लेकर भी लंबे समय से चर्चित रहे हैं। दरअसल, पहाड़ के प्रवासियों को अपने मूल गांवों से जोड़ने को अनिल बलूनी ने एक भावनात्मक अभियान चलाया कि प्रवासी इगास मनाने ही सही एक बार अपने खेत खलियान में आएं। इससे प्रवासियों की नई पीढ़ी का अपनी जड़ों की तरफ लगाव पनपेगा, जो अंततोगत्वा पलायन की प्रवृत्ति में किसी हद तक कमी ला सकता है। उनका इगास पर्व मनाने का अभियान अब पहाड़ में काफी असर दिखाने लगा है, बाकायदा सरकारी स्तर पर भी इस पर्व को मनाया जाने लगा है।
देश के सर्वोच्च सदन के सदस्य के तौर पर अनिल बलूनी जिस तरह से उत्तराखंड के पहाड़ के लिए दीर्घकालीन योजनाओं का खाका खींचकर उन्हें मंजूरी दिलवाने को प्रयासरत हैं, उससे वह यह नजीर पेश करने जा रहे हैं कि विकास योजनाओं का दायरा छोटा कालखण्ड न होकर दीर्घकालिक व बहुआयामी होना चाहिए। रास्ते, खडंजा, सीसी, रेलिंग जैसे कार्य ब्लॉक व जिलास्तरीय प्रतिनिधि आसानी से सम्पादित कर सकते हैं, लोकसभा सांसद ऐसी परियोजनाओं पर पसीना बहाएं जो सस्टेनेबल डेवलपमेंट के साथ मल्टी परपज़ भी हों ।

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