आज 25 सितंबर 2025 है। आज आश्विन नवरात्र का तीसरा दिन है। आज नवरात्रि का तृतीय दिवस है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है ।मां चंद्रघंटा पाप का नाश कर असुरों का वध करती है।धार्मिक मान्यता के अनुसार असुरों का आतंक बढ़ने पर मां दुर्गा ने अपने तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा का अवतार लिया और उन्हें सबक सिखाया। चंद्रघटा अपने शांत और सौम्य स्वरूप के लिए जानी जाती है। मां अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं।
दो दिन मां की पूजा
इस साल शारदीय नवरात्रि 9 नहीं बल्कि पूरे 10 दिनों की पड़ रही है। इस कारण इस साल तृतीया तिथि एक नहीं बल्कि दो दिन पड़ेगी। ऐसे में मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा दो दिनों तक की जाएगी। ऐसा संयोग कई सालों के बाद बन रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार, ऐसा संयोग 1998 में बना था। उस समय चतुर्थी तिथि दो दिनों तक थी। तृतीया तिथि 24 सितंबर को सुबह 4 बजकर 51 मिनट से आरंभ हुई है, जो 25 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। ऐसे में तृतीया तिथि में वृद्धि होने के कारण मां चंद्रघंटा की पूजा दो दिन की जाएगी।
ऐसा है मां का स्वरूप
मां चंद्रघंटा ने राक्षसों का संहार करने के लिए अवतार लिया था और उनमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्तियां हैं। मां चंद्रघंटा का स्वरूप हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा व धनुष धारण किए है। देवी मां के माथे पर अर्द्ध चंद्र विराजमान है जिसके चलते उन्हें चंद्रघंटा नाम मिला है। राक्षसों का विनाश करने वाली मां चंद्रघंटा भक्तों के लिए शांत और सौम्य व्यक्तित्व की हैं।भोग में मां चंद्रघंटा की प्रिय चीजें लगाई जा सकती हैं इनमें केसर और दूध से तैयार की गईं मिठाइयां और फल आदि शामिल हैं।दूध से बने अन्य मिष्ठान भी मां चंद्रघंटा को चढ़ाए जा सकते हैं और इस भोग को ही प्रसाद स्वरूप खाया जाता है। भोग में शहद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।