अभ्यार्थियों पर दर्ज सभी मुकदमे भी सरकार वापस लेगी।

देहरादून। उत्तराखंड में पेपर लीक मामले की जांच अब सीबीआई करेगी और आंदोलनकारी छात्रों और अभ्यार्थियों पर दर्ज सभी मुकदमे भी सरकार वापस लेगी। इतना ही नहीं बेरोजगार संघ की एक माह के भीतर दोबारा भर्ती परीक्षा कराने की मांग को एसआईटी जांच के सामने आने के बाद सरकार निर्णय लेगी।

उक्त बात बेरोजगार संघ के बैनर तले पिछले एक सप्ताह से भी अधिक समय से पेपर लीक के विरोध में आंदोलनरत छात्रों और युवाओं के बीच अचानक पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी मांगों के संदर्भ में कही। उन्होंने सोमवार को परेड़ ग्राउंड के समीप पेपर लीक मामले में पिछले आठ दिनों से आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं और युवाओं के मध्य पहुंच कर इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश करने की बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वह प्रदेश के युवाओं के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंदोलनरत छात्र-छात्राओं और युवाओं से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि आने वाला अगला दशक उत्तराखंड है और वह उत्तराखंड के युवाओं के बिना संभव नहीं है। इसलिए सरकार युवाओं के साथ अन्याय नहीं होने देगी और जहां भी कोई गड़बड़ी हुई है उसकी सजा घोटाले करने वालों को अवश्य मिलेगी।

ज्ञात हो कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की 21 सितंबर को हुई परीक्षा का पेपर लीक होने की लगातार बात कही जा रही है। जिसके बाद छात्रों छात्र-छात्रायें और युवा पूरे राज्य में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मामले में राज्य सरकार कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सस्पेंड किया गया है।

हरिद्वार में तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट केएन तिवारी को निलंबित किया गया। इसके अलावा, टिहरी के अगरोड़ा कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को भी पेपर हल कर भेजने में संलिप्त पाए जाने के आरोप में निलंबित किया गया। परीक्षा केंद्र पर तैनात दारोगा, कांस्टेबल को भी सस्पेंड किया गया। परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित रूप से लीक होने के मामले में मुख्य आरोपी खालिद मलिक और उसकी बहन साबिया सलाखों के पीछे हैं। सेवानिवृत्ति जज की निगरानी में सीट का गठन कर भी इस मामले में जांच चल रही है।

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