_भारतीय परंपरा में विश्वास का बंधन सर्वोपरि है। यह एक ऐसा बंधन है जो हमें पारिवारिक एवं सामाजिक परिवेश में एक दूसरे के साथ जोड़े रखता है। रक्षाबंधन इसी विश्वास रूपी बंधन का एक पवित्र रिश्ते का त्यौहार है। यह पर्व मात्र रक्षा सूत्र के रूप में राखी बांधकर रक्षा का वचन ही नहीं देता अपितु प्रेम, निष्ठा, संकल्प के जरिए हृदय को बांधने का भी वचन देता है। रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम और स्नेह के मजबूत बंधन को प्रदर्शित करता है। रक्षाबंधन का पर्व पवित्रता, प्रेम और आत्मीयता का पर्व है। ये विशुद्ध रूप से भाई और बहन की एकात्मकता, परस्पर प्रीति और उन संवेदनाओं का पर्व है जिसमे भाई प्रण लेता है, भगिनी की रक्षा के लिए। यद्यपि नारी की सामर्थ अपार है, वह सदा से ही विद्या, बुद्धि, विवेक चातुर्य, कला, कौशल और उन सभी प्रतिभाओं की धनी रही है जो दैवीय प्रतिभा हैं। फिर भी उसकी सुकोमलता, उसकी संवेदनशीलता, उसकी सहज उन प्रवृत्तियों के लिए जिनमें वह अत्यन्त विनम्र है और समर्पित है सबके लिए, इस कारण वह दुर्बल सी प्रतीत होती है जबकि वह ऐसी नही है। आज के दिन भाई प्रण लेता है कि मैं जीवनपर्यन्त अपनी बहन की रक्षा करूँगा और उसके अधिकारों के प्रति सचेत रहूँगा।_
_रक्षाबंधन के इस शुभ अवसर पर हम सब संकल्प लें कि हमारे समाज में पारंपरिक रूप से माताओं -बहनों को प्रदान की गई गरिमा और सम्मान की हम रक्षा करेंगे…।_
_शास्त्रोक्त कथन है:-_
*येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबलः l*
*तेन त्वाम् अनुबध्नामि, रक्षे मा चल मा चल ll*
_अर्थात :-_
_“जिस रक्षासूत्र को दानवों के ईंद्र महाबलशाली राजा बलि के हाथ में बाँध कर लक्ष्मी ने उनकी रक्षा सुनिश्चित की, हे रक्षासूत्र ! आज मैं तुम्हें अपने राजा/यजमान/भाई के हाथ में उसकी सुरक्षा के लिए बाँध रहा/रही हूँ l हे रक्षे (रक्षक) ! तुम यहाँ से चलायमान मत हो जाना यानि दृढ़तापूर्वक स्थिर होकर इनकी रक्षा करते रहना ल”_
_प्रेम ,स्नेह और सौहार्द से परिपूर्ण भाई-बहन के पवित्र रिश्तों के पावन पर्व रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं….
*- डॉ. सुरेन्द्र शर्मा*