नैनीताल। हाई कोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया, जहां एक मुस्लिम समुदाय की युवती ने अपनी पसंद और प्यार का हवाला देकर हिंदू युवक से शादी करने की इच्छा जताई। युवती ने कोर्ट से अपने और अपने होने वाले पति के परिवार की सुरक्षा की मांग की।
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की और सितारगंज थाना पुलिस को युवती, उसके होने वाले पति और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के आदेश दिए।
युवती ने सितारगंज के SHO को प्रार्थना पत्र सौंपकर बताया कि उसे हिंदू धर्म बहुत पसंद है और वह बालिग है। उसने कहा कि वह अपने क्षेत्र के एक हिंदू युवक से शादी करना चाहती है, जिसका परिवार साधारण और नेक है।
वह इस परिवार को कई सालों से जानती है। लेकिन जब शादी की बात आई, तो उसके परिवार ने इसका कड़ा विरोध किया। युवती ने बताया कि उसके परिजन न सिर्फ शादी के खिलाफ हैं, बल्कि उसे और उसके होने वाले पति के परिवार को धमकियां भी दे रहे हैं। डर और असुरक्षा के चलते युवती ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की और सुरक्षा की गुहार लगाई।
खंडपीठ में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने युवती से पूछा कि उसका होने वाला पति क्या करता है। युवती ने बताया कि वह डीजे और ड्राइविंग का काम करता है। इस पर कोर्ट ने थोड़ा हल्के-फुल्के अंदाज में पूछा, “डीजे क्या होता है?” युवती इसका सटीक जवाब नहीं दे पाई।
कोर्ट ने हल्की हंसी के साथ टिप्पणी की, “आपका भविष्य उज्ज्वल है, आपको यह भी नहीं पता कि आपका पति क्या करता है!” इसके बाद कोर्ट ने गंभीरता से मामले को देखते हुए सितारगंज थाना पुलिस को तुरंत सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए।
नैनीताल हाई कोर्ट के इस फैसले ने युवती और उसके होने वाले पति के परिवार को राहत दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि युवती बालिग है और अपनी मर्जी से शादी करने का हक रखती है।
सितारगंज पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह युवती और उसके होने वाले पति के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह मामला न सिर्फ प्यार और पसंद की आजादी की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कानून हर नागरिक के हक की रक्षा के लिए तत्पर है।